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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता गीत "माटी माय के पुकार" जारी।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

पीरटांड प्रखंड मुख्यालय में बीटीएम अमित कुमार ने किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण कृषि पद्धति अपनाने के लिए समेती, झारखंड द्वारा विशेष जागरूकता गीत "माटी माय के पुकार" तैयार किया गया है। यह गीत झारखंड की लोक संस्कृति और ग्रामीण परिवेश को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें धरती माता की भावनाओं को स्वर देकर किसानों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुँचाने का प्रयास किया गया है। गीत में रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को दर्शाते हुए प्राकृतिक खेती के लाभों को सरल और भावनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

साथ ही जीवामृत, घनजीवामृत, निमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं अग्नेयास्त्र जैसे प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों का उल्लेख कर किसानों को इनके उपयोग के प्रति प्रेरित किया गया है। इस गीत के माध्यम से किसानों को कम लागत में खेती करने, स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाने का संदेश दिया गया है। समेती, झारखंड ने राज्य के किसानों, कृषि कर्मियों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे प्राकृतिक खेती के इस संदेश को गांव-गांव और घर-घर तक पहुँचाने में सहयोग करें। संस्था का मानना है कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर झारखंड के निर्माण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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