शास्त्रों की दिव्य वाणी हमारे जीवन का आधार है : मुनि प्रमाणसागर।
SHIKHAR DARPANFriday, June 19, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
राष्ट्रसंत मुनि प्रमाणसागर ने कहा कि हम देव, शास्त्र और गुरु के आराधक हैं। यदि आज आगम-वाणी उपलब्ध न होती, तो जीवन की सही दिशा प्राप्त करना कठिन होता। शास्त्र वास्तव में हमारी आत्मा की आंख हैं, जो अंतरदृष्टि को जागृत कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। वे गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकाल भगवान का अभिषेक एवं मुनिश्री के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई। इस अवसर पर एक बालक को जैनत्व के संस्कार भी प्रदान किए गए। अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि शास्त्रों और जिनवाणी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा आवश्यक है, लेकिन केवल पूजा-अर्चना ही शास्त्र-आराधना नहीं है। वास्तविक आराधना तब होती है जब शास्त्रों के उपदेशों को जीवन में उतारा जाए और उनके संरक्षण का दायित्व भी निभाया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में स्वाध्याय के प्रति लोगों की रुचि लगातार कम होती जा रही है।
पहले लोग घंटों प्रवचन सुनते थे और जीवनभर उन्हें याद रखते थे, लेकिन आज रील्स और त्वरित मनोरंजन के दौर में एकाग्रता और अध्ययन की प्रवृत्ति कमजोर पड़ रही है। लोग सैकड़ों वीडियो देखते हैं, पर उनमें से कोई एक संदेश भी स्थायी रूप से स्मरण नहीं रख पाते। यह स्थिति चिंताजनक है। मुनि ने कहा कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही तो आने वाले समय में शास्त्र केवल डिजिटल संग्रहों तक सीमित होकर रह जाएंगे और शास्त्र-भंडारों में सुरक्षित जिनवाणी का प्रत्यक्ष स्वरूप धीरे-धीरे लुप्त होने लगेगा। इसलिए समाज को सामूहिक रूप से स्वाध्याय की परंपरा को मजबूत बनाना होगा। मंदिरों में नियमित शास्त्र-पठन हो, जिनवाणी का सम्मानपूर्वक संरक्षण किया जाए तथा नई पीढ़ी को अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल श्रुत पंचमी के दिन शास्त्रों की पूजा-अर्चना कर लेने से दायित्व पूरा नहीं होता। श्रुत पंचमी का वास्तविक उद्देश्य जिनवाणी का अध्ययन, संरक्षण और उसके आदर्शों को जीवन में उतारना है। जब हम शास्त्रों का अध्ययन कर अपने जीवन को संस्कारित करेंगे, आत्मकल्याण का मार्ग समझेंगे और दूसरों को भी प्रेरित करेंगे, तभी श्रुत पंचमी पर्व का उत्सव सार्थक माना जाएगा।