80 की उम्र, हाथ में लाठी... फाइलों में नाम नहीं: तिसरी के नूनमन राय पेंशन-आवास को तरस रहे।
SHIKHAR DARPANWednesday, June 17, 2026
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तिसरी,शिखर दर्पण संवाददाता।
चन्दन भारती.
उम्र 80 साल, लाठी का सहारा, टपकती छत... और सरकारी सुविधाओं की फाइल में इनके लिए कोई जगह नहीं। गिरिडीह के नूनमन राय की कहानी 'अंत्योदय' के दावे पर सबसे बड़ा सवाल है।सरकारें "अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने " का दावा करती हैं, पर गिरिडीह के तिसरी प्रखंड में तस्वीर कुछ और है। लोकाई नयनपुर पंचायत के भुलाडीह गांव में 80 वर्षीय नूनमन राय आज भी बुढ़ापे की पेंशन और छत के लिए तरस रहे हैं। नूनमन राय लाठी के सहारे चलते हैं। उम्र 80 पार, पर सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम अब तक पेंशन की लिस्ट में नहीं चढ़ा। उनका कहना है, "मुखिया से लेकर सबको बोलकर थक गया। आज तक एक रुपया पेंशन नहीं मिली।"
*बरसात में खड़े - खड़े कटती है रात, छत से टपकता है पानी* रहने की हालत और बदतर है। मिट्टी की दीवार, ऊपर एस्बेस्टस-खपरैल, लकड़ी के सहारे टिकी छत। बहु फुलवा देवी बताती हैं, "बारिश में पूरा घर टपकता है। पूरी रात जागकर काटनी पड़ती है।" परिवार को अब तक किसी भी सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिला। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पंचायत मुखिया और जनप्रतिनिधियों को कई बार बताया, पर हर बार सिर्फ दिलासा मिला। वार्ड सदस्य जयशंकर शर्मा ने सवाल उठाया, "बुजुर्ग चलने में असमर्थ हैं।
क्या प्रशासन उनके ब्लॉक ऑफिस आने का इंतजार कर रहा है? 'सरकार आपके द्वार' के बीच 80 साल के आदमी को भटकना पड़े तो सिस्टम पर सवाल उठेंगे ही।" उन्होंने तिसरी बीडीओ और डीसी गिरिडीह से इन्हें तुरंत पेंशन व आवास देने की मांग की। मुखिया प्रतिनिधि तालो ने बचाव में कहा कि अबुआ आवास की सूची में नाम है पर फंड नहीं आया। पेंशन के लिए कुछ कागजात अधूरे थे, फॉर्म भराया जाएगा। वहीं तिसरी बीडीओ मनीष कुमार ने कहा, "मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।" सवाल वही : 80 साल की उम्र में हक मांगने के लिए भी दौड़ लगवानी पड़े, तो "अंत्योदय" का वादा कितना पुख्ता है? बहरहाल प्रशासन को इस दिशा में तत्काल सकारात्मक पहल करनी चाहिए।