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पूज्य आर्यिकाओं के आकस्मिक समाधिस्थ होने पर मुनि प्रमाणसागर महाराज ने व्यक्त की गहन संवेदना।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महामुनिराज की परम साधिका शिष्या एवं आचार्य समय सागर महाराज की आज्ञानुवर्ती पूज्य आर्यिका श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका उपशममति माताजी के आकस्मिक समाधिस्थ होने का अत्यंत दुःखद समाचार सुनकर गुणायतन में विराजमान वरिष्ठ मुनि प्रमाणसागर महाराज ने गहन चिंता एवं शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस असहनीय वज्रपात समान घटना से समूचे भारतवर्ष की जैन समाज में शोक की लहर व्याप्त है। यह केवल जैन समाज ही नहीं, अपितु संपूर्ण आध्यात्मिक जगत के लिये अपूरणीय क्षति है।

उन्होंने प्रशासन से भी अपेक्षा व्यक्त की कि इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिये तथा समाज को भी साधु-संतों के मंगल विहार के समय पूर्ण सजगता एवं सहयोग के साथ उपस्थित रहना चाहिये। समूचे गुणायतन परिवार एवं जैन समाज ने पूज्य माताजी के प्रति श्रद्धा, विनय एवं कृतज्ञता अर्पित करते हुए उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि समर्पित की तथा सभी भक्तजनों एवं परिवारजनों को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्राप्त हो, ऐसी भगवान महावीर से मंगल कामना की। प्रातः6:30 बजे शौच क्रिया से लौटते समय मध्यप्रदेश रीवा में यह घटना एक तेज रफ्तार कार से घटी।

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