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खुखरा पंचायत की ऐतिहासिक धरोहर ‘फ़ॉरेस्ट रेस्ट हाउस’ जर्जर, पुनरुद्धार की उठी मांग।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत खुखरा पंचायत के बरियारपुर गाँव में स्थित पुराना “फ़ॉरेस्ट रेस्ट हाउस” आज खंडहर में तब्दील हो चुका है, जबकि एक समय यह क्षेत्र की महत्वपूर्ण प्रशासनिक और ऐतिहासिक धरोहर हुआ करता था।खुखरा पंचायत समिति सदस्य केशव पाठक ने बताया कि वर्ष 1959-60 के आसपास वन विभाग द्वारा बरियारपुर-पालगंज पथ पर पलाश के घने जंगलों के बीच इस डाकबंगले का निर्माण कराया गया था। उस दौर में यह रेस्ट हाउस आधुनिक सुविधाओं से लैस था, जहाँ उच्च पदस्थ अधिकारी ठहरते थे और विभागीय बैठकें आयोजित होती थीं। परिसर में सुंदर बाग-बगीचे, गैरेज और रसोईघर जैसी व्यवस्थाएँ भी मौजूद थीं, जो इसकी उपयोगिता और आकर्षण को बढ़ाती थीं। इस भवन की देखरेख स्वर्गीय गोविंद महतो द्वारा की जाती थी, जो वन विभाग के चौकीदार के रूप में पूरे परिसर को सजीव बनाए रखते थे। वहीं, वर्ष 1961-62 में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी नृपेंद्र सेनगुप्त भी यहां ठहरकर क्षेत्रीय विकास कार्यों की समीक्षा किया करते थे।

उस समय यह रेस्ट हाउस प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। समय बीतने के साथ अधिकारियों का आना-जाना कम होता गया और देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक इमारत धीरे-धीरे जर्जर होती चली गई। वर्तमान में इसकी स्थिति खंडहरनुमा हो गई है, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान मिटने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, इस धरोहर के पुनर्जीवन की उम्मीद अभी भी कायम है। हाल ही में पीरटांड़ प्रखंड सभागार में आयोजित पंचायत समिति की बैठक के दौरान इस “फ़ॉरेस्ट रेस्ट हाउस” के पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक भवन का संरक्षण और पुनरुद्धार किया जाए, तो यह न केवल क्षेत्र की पहचान को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि पर्यटन और स्थानीय विकास को भी बढ़ावा देगा। अब जरूरत है प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयास की, ताकि खुखरा पंचायत की यह ऐतिहासिक धरोहर एक बार फिर अपनी पुरानी गरिमा के साथ जीवंत हो सके।

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