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मन का विजेता ही जगत का विजेता बन जाता है : -मुनि प्रमाण सागर ।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

गुणायतन मधुवन में विराजमान राष्ट्रीय संत मुनि प्रमाण सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज मनुष्य असंतोष, इच्छाओं और मानसिक विकारों की अग्नि में जल रहा है। वैभव और सुविधाएँ होने के बाद भी यदि संतोष नहीं है, तो यह मनुष्य जीवन की दौड़ में हार है"उन्होंने कहा कि ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, क्रोध और आवेश मनुष्य को भीतर ही भीतर कमजोर बना रहे हैं" मुनि श्री ने कहा कि जो अपने मन को नियंत्रित नहीं कर पाते वह परिस्थितियों का दास बन जाते है, जबकि जिसने अपने मन पर विजय पा ली, उसे संसार की कोई शक्ति पराजित नहीं कर सकती। मुनि श्री ने कहा— “जितं जगत् केन? मनो येन” अर्थात जिसने मन को जीत लिया, उसने संसार को जीत लिया। मन का विजेता ही जगत का विजेता है।उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान, आत्मजागृति और आत्म नियंत्रण ही सच्ची आत्मविजय के आधार हैं।

संध्याकालीन शंकासमाधान कार्यक्रम में मुनि प्रमाणसागर महाराज ने रीवा की दुःखद घटना को लेकर चल रहे संत सुरक्षा आंदोलन पर भी विचार व्यक्त किए। गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनि श्री के आह्वान पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश के ललितपुर वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, सहित मध्यप्रदेश के अनेक शहरों में तथा कस्वों में समाजजनों ने मौन रैली निकाली एवं जिला प्रशासन तथा तहसील एवं पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे।मुनि प्रमाणसागर महाराज ने  सरकार द्वारा एसआई टी के गठन का स्वागत किया है, उन्होंने कहा कि समाज का उद्देश्य केवल जांच नहीं है, बल्कि देशभर में साधु-संतों की सुरक्षित एवं निर्भय विहार व्यवस्था सुनिश्चित करना है। जिससे इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। इसके लिये समाज को सतत सजग, संगठित और सक्रिय बने रहने की आवश्यकता है।

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