“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत जिला स्तरीय माहवारी स्वच्छता प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय मास्टर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
SHIKHAR DARPANThursday, April 23, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग तथा यूनिसेफ की सहयोगी संस्था लीड्स के संयुक्त तत्वावधान में मिशन शक्ति अंतर्गत “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत आज डीआरडीए सभागार में जिला स्तरीय माहवारी स्वच्छता प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय मास्टर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उप विकास आयुक्त, श्रीमती स्मृता कुमारी एवं जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनिता कुजूर के द्वारा दीप प्रज्वलित के साथ किया गया। कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि माहवारी स्वच्छता को लेकर महिलाओं एवं किशोरियों में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी माहवारी से जुड़े कई मिथक एवं भ्रांतियां व्याप्त हैं, जिन्हें सही जानकारी और संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यालयों में माहवारी स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों एवं स्थापित स्वच्छता कक्षों के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल दिया।उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विद्यालय स्तर पर किशोरियों को प्रारंभिक अवस्था से ही माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि वे इस विषय को लेकर सहज, सुरक्षित और आत्मविश्वासी बन सकें।
उन्होंने विद्यालयों में संचालित माहवारी स्वच्छता संबंधी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई तथा वहां स्थापित माहवारी स्वच्छता कक्षों के समुचित एवं नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने पर बल दिया। उप विकास आयुक्त ने कहा कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जागरूकता की इस पहल को जन-जन तक पहुंचाएंगे। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लाते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं और माहवारी स्वच्छता को एक जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करने में अपना योगदान दें। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अनीता कुजूर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना गया है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में आंगनबाड़ी केंद्रों में भी माहवारी स्वच्छता एवं “माहवारी कॉर्नर” के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण को गंभीरता से ग्रहण कर अपने-अपने प्रखंडों में जनजागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के राज्य परामर्शी द्वारा तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के चार प्रमुख स्तंभ—जागरूकता, सेवा सुविधा, उत्पादों की उपलब्धता एवं सुरक्षित निपटान—पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशिक्षण में समूह कार्य, संवाद एवं प्रतिभागियों के अनुभव साझा करने की प्रक्रिया ने इसे और अधिक प्रभावी बनाया।सदर अस्पताल, गिरिडीह से डॉ. सर्जना शर्मा ने अपने संबोधन में किशोरियों को प्रारंभिक अवस्था से ही माहवारी के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि माहवारी के प्रति जानकारी के अभाव में कई बार भय एवं संकोच की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने संतुलित आहार, स्वच्छता एवं उपयोग किए गए सेनेटरी नैपकिन के सुरक्षित निपटान के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि माहवारी स्वच्छता की अनदेखी से सर्वाइकल कैंसर एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने किशोरियों एवं महिलाओं को मेनार्की से लेकर मेनोपॉज तक जागरूक एवं तैयार रहने की सलाह दी। प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षिकाएं एवं लीड्स संस्था के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षकों को सक्षम बनाना है, ताकि वे जमीनी स्तर पर प्रभावी जागरूकता अभियान संचालित कर सकें और समाज में माहवारी स्वच्छता को लेकर सकारात्मक बदलाव ला सकें।