कार्यों के निष्पादन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दें:- उपायुक्त।
SHIKHAR DARPANFriday, March 13, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
समाहरणालय सभागार में उपायुक्त रामनिवास यादव की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति (DLMC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य कार्यकारी एजेंसियों के माध्यम से संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत किए गए कार्यों की समीक्षा करना तथा चयनित एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत विपत्रों का मूल्यांकन कर उनके अनुमोदन पर विचार किया गया। बैठक में संबंधित विभागों के पदाधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ एवं समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक के दौरान उपायुक्त ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। इसके लिए एजेंसियों की जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि योजनाओं का उद्देश्य पूर्ण रूप से साकार हो सके। इस अवसर पर चयनित एजेंसियों द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर प्रस्तुत विपत्रों का भी बिंदुवार मूल्यांकन किया गया।
तकनीकी पदाधिकारियों द्वारा कार्यों की गुणवत्ता, प्रगति और मानकों के अनुरूपता की जानकारी दी गई। समिति के सदस्यों ने प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर यह सुनिश्चित किया कि किए गए कार्य निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं। संतोषजनक पाए जाने पर कई विपत्रों को अनुमोदन प्रदान किया गया, जबकि कुछ मामलों में आवश्यक सुधार एवं स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे कार्यों के निष्पादन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दें। साथ ही संबंधित विभागों को भी निर्देशित किया गया कि वे समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की निगरानी करते रहें।बैठक के अंत में उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य योजनाओं के माध्यम से जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी विभागों एवं एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर उसका त्वरित समाधान किया जाए, ताकि विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।