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जंगलों में बढ़ती आग की घटनाएं चिंता का विषय, लोगों से सतर्कता बरतने की अपील।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

गिरिडीह समेत राज्य के कई जिलों से इन दिनों जंगलों में आग लगने की लगातार खबरें सामने आ रही हैं। जंगलों में लगने वाली आग न केवल पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाती है बल्कि वहां रहने वाले छोटे-छोटे जीव-जंतुओं के जीवन पर भी गंभीर खतरा बन जाती है। जंगलों में लगी आग को बुझाना काफी कठिन होता है, क्योंकि कई स्थान ऐसे होते हैं जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तो क्या, लोगों का पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आग लंबे समय तक जलती रहती है और धीरे-धीरे बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लेती है।जानकारों के अनुसार जंगलों में लगने वाली आग के पीछे अधिकतर मानवीय लापरवाही जिम्मेदार होती है। कई लोग सिगरेट या बीड़ी पीने के बाद उसे बिना बुझाए जंगल या सड़क किनारे फेंक देते हैं, जिससे सूखे पत्तों में आग लग जाती है। इसके अलावा महुआ चुनने के लिए कुछ लोग पेड़ों के नीचे गिरे सूखे पत्तों में आग लगा देते हैं, जिससे महुआ चुनना आसान हो जाता है। यही दो कारण जंगलों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं।

वन क्षेत्रों से जुड़े लोगों का कहना है कि महुआ चुनने के लिए आग लगाने के बजाय पेड़ों के नीचे गिरे पत्तों को एक जगह इकट्ठा कर दिया जाए तो भी काम आसानी से हो सकता है। कई लोग इन पत्तों को इकट्ठा कर घर ले जाते हैं और उनका उपयोग चारा, खाद या ईंधन के रूप में भी करते हैं।इधर मौसम विभाग की ओर से मार्च महीने में ही कुछ जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की जा चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, जिससे जंगलों में आग लगने की घटनाएं और भी बढ़ सकती हैं।ऐसे में आम लोगों से अपील की जा रही है कि वे जानबूझकर या लापरवाही से जंगलों में आग फैलने का कारण न बनें। यदि कहीं जंगल में आग लगती हुई दिखाई दे तो तुरंत उसे बुझाने का प्रयास करें और इसकी सूचना तत्काल फायर ब्रिगेड या वन विभाग को दें। साथ ही आग बुझाने के कार्य में प्रशासन का सहयोग करें, ताकि जंगलों और वन्य जीवों को बचाया जा सके।

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