Type Here to Get Search Results !

उपेक्षा का शिकार हुआ हरलाडीह सार्वजनिक शौचालय, दीवारों पर फीकी पड़ी स्वच्छता संदेश।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

*अनिलेश गौरव

पीरटांड प्रखंड के विभिन्न इलाकों में स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी हकीकत चिंताजनक होती जा रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण तो कराया गया, लेकिन उनकी नियमित देखरेख और रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर ये सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं। इसका ताजा उदाहरण हरलाडीह में बना सार्वजनिक शौचालय है, जो इन दिनों पूरी तरह बदहाली और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।स्थानीय स्तर पर बने इस शौचालय की स्थिति बेहद जर्जर हो चुकी है। भवन की दीवारों पर लिखे स्वच्छता संबंधी संदेश अब धुंधले पड़ गए हैं और जगह-जगह पेंट उखड़ जाने से पूरी संरचना खस्ताहाल दिखाई देती है। शौचालय के दोनों ओर लगे लोहे के दरवाजों पर जंग लग चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय से इसकी मरम्मत या उपयोग की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।

इतना ही नहीं, शौचालय परिसर के आसपास झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और कचरे का अंबार लगा हुआ है, जो स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल खड़ा करता है।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुविधाओं की देखरेख नहीं होने से योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। हरलाडीह का यह सार्वजनिक शौचालय अधिकांश समय बंद रहता है और कई बार उसमें ताला लटका मिलता है। उपयोग के अभाव और गंदगी के कारण ग्रामीणों को इसका कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि क्षेत्र में स्वच्छता अभियान की निगरानी व्यवस्था कमजोर है।दीवारों पर अंकित “हर घर स्वच्छता” और जल संरक्षण से जुड़े संदेश अब मुश्किल से पढ़े जा सकते हैं।

ये दृश्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लंबे समय से न तो रंगाई-पुताई हुई है और न ही नियमित साफ-सफाई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सार्वजनिक सुविधाओं का समय-समय पर रखरखाव नहीं किया गया, तो सरकारी योजनाओं पर खर्च होने वाली राशि व्यर्थ चली जाएगी और ग्रामीणों का भरोसा भी कमजोर होगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हरलाडीह स्थित सार्वजनिक शौचालय की शीघ्र मरम्मत कर उसे उपयोग योग्य बनाया जाए। साथ ही रंगाई-पुताई, साफ-सफाई, आसपास की झाड़ियों की कटाई और नियमित निगरानी की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल कागजों तक सीमित न रहकर व्यवहारिक रूप से भी दिखाई दे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो अन्य स्थानों पर बने सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी ऐसी ही हो सकती है, जो स्वच्छता प्रयासों के लिए गंभीर चुनौती साबित होगी।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.