पीरटांड से निकला नक्सली आतंक, सारंडा में हुआ अंत// 2.50 करोड़ के इनामी अनल दा के मारे जाने से झारखण्ड नक्सल नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका।
SHIKHAR DARPANFriday, January 23, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
झारखंड पुलिस ने नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे निर्णायक कार्रवाई करते हुए पीरटांड क्षेत्र से जुड़े नक्सली आतंक की रीढ़ तोड़ दी है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा अंतर्गत सारंडा के घने जंगलों में गुरुवार को सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमिटी सदस्य (सीसीएम) और करीब 2.50 करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी समेत कुल 12 नक्सली मारे गए। यह वही नक्सली था, जिसने वर्षों तक गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र को माओवादी गतिविधियों का मुख्य अड्डा बनाए रखा और पूरे इलाके में भय का माहौल कायम किया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह कार्रवाई नक्सल संगठन के लिए ऐसा झटका है, जिससे उबर पाना अब बेहद मुश्किल माना जा रहा है।
*पीरटांड के झरहा गांव से माओवादी शीर्ष तक का सफर* मारा गया नक्सली अनल दा का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ तुफान उर्फ रमेश था। वह गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र स्थित झरहा गांव का निवासी था। शुरुआती दौर में वह स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहा, लेकिन बाद में माओवादी संगठन के लालखंडी गिरोह से जुड़कर पूरे पीरटांड, डुमरी और सीमावर्ती इलाकों में नक्सली नेटवर्क का विस्तार करने लगा। धीरे-धीरे उसने संगठन में अपनी पकड़ मजबूत की और केंद्रीय कमिटी तक पहुंच गया। पीरटांड क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के विस्तार, संगठन की भर्ती, हथियारों की सप्लाई और पुलिस मूवमेंट की रेकी जैसे अहम कामों की जिम्मेदारी उसी के पास थी, जिस कारण वह माओवादी संगठन का सबसे भरोसेमंद चेहरा बन गया था।
*पीरटांड में दर्ज दर्जनों संगीन अपराध, दहशत का पर्याय बना नाम:- अनल दा के खिलाफ गिरिडीह जिले के विभिन्न थानों में सैकड़ों आपराधिक मामले दर्ज हैं। खासकर पीरटांड थाना और डुमरी थाना में उसके विरुद्ध दर्जन भर से अधिक गंभीर मामले दर्ज थे। उसके नाम पर होमगार्ड कैंप पर हमला, राइफल लूट, पीरटांड के पांडेडीह के समीप प्राइवेट सिक्योरिटी कर्मियों को आईडी ब्लास्ट में उड़ाना, पुलिस पर हमले और कई मुठभेड़ों में शामिल रहने जैसे जघन्य अपराध दर्ज हैं। वर्षों तक उसका नाम ही इलाके में डर पैदा करने के लिए काफी था। आम ग्रामीण, ठेकेदार और सरकारी कर्मी तक उसके नाम से सहमे रहते थे, जिससे विकास कार्य लगातार बाधित होते रहे।सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अनल दा माओवादी संगठन की रणनीतिक रीढ़ माना जाता था। उस पर झारखंड सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार द्वारा 1 करोड़ 20 लाख रुपये तथा एनआईए द्वारा 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वर्ष 2022 के बाद से सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में हुए कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश उसी ने रची थी। मुठभेड़ में उसके साथ अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, पिंटू लोहरा, लालजीत उर्फ लालू, राजेश मुंडा, बुलबुल अलदा, बबिता, पूर्णिमा, सूरजमुनी समेत कई अन्य इनामी माओवादी भी मारे गए। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।