नए यूजीसी नियम और प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम 2026 के खिलाफ सामान्य वर्ग में आक्रोश।
SHIKHAR DARPANWednesday, January 28, 2026
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*कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सह युवा इंटक के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकेश मिश्रा ने अपने प्रदेश प्रभारी को भेजा मांगपत्र।
गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
देश में लागू किए जा रहे नए यूजीसी नियमों एवं प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 को लेकर सामान्य वर्ग के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और मध्यमवर्गीय समाज में गहरी नाराज़गी और असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। इसे लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश सचिव सह युवा इंटक के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकेश मिश्रा एवं विभिन्न सामाजिक व बौद्धिक वर्गों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इन नियमों के माध्यम से मेरिट, अकादमिक स्वतंत्रता और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है।आरोप लगाया गया है कि शिक्षा सुधार के नाम पर उच्च शिक्षा संस्थानों में केंद्रीकरण और नौकरशाही हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है, जो संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक ढांचे के विपरीत है। वक्ताओं का कहना है कि विश्वविद्यालयों को स्वायत्त बनाने के बजाय उन्हें प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जा रहा है।इस मुद्दे को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा गया कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सामान्य वर्ग कांग्रेस पार्टी का कोर वोट बैंक रहा है, लेकिन 1990 के बाद आरक्षण नीतियों में संतुलन और मेरिट की पर्याप्त सुरक्षा न मिलने के कारण सामान्य वर्ग का बड़ा हिस्सा राजनीतिक रूप से हाशिये पर चला गया और धीरे-धीरे भाजपा व आरएसएस की ओर आकर्षित हुआ।
बताया गया कि नए यूजीसी नियम और प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 इसी राजनीतिक दूरी को और गहरा करने का काम कर रहे हैं। यदि कांग्रेस पार्टी इस विषय पर स्पष्ट और मुखर विरोध दर्ज नहीं कराती है, तो यह संदेश जाएगा कि सामान्य वर्ग की चिंताओं की एक बार फिर अनदेखी की जा रही है।
*इस क्रम में मांग की गई कि:-
1.नए यूजीसी नियमों एवं प्रस्तावित यूजीसी अधिनियम, 2026 को तत्काल वापस लिया जाए या स्थगित किया जाए। 2.इन प्रावधानों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए और राष्ट्रव्यापी परामर्श किया जाए। 3.सामाजिक न्याय और मेरिट के बीच संतुलन, अकादमिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक समानता की गारंटी सुनिश्चित की जाए। वही वक्ताओं ने कहा कि यह केवल शिक्षा नीति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं, मध्यमवर्ग और कांग्रेस पार्टी के भविष्य से जुड़ा एक अहम राजनीतिक प्रश्न है। यदि कांग्रेस इस मुद्दे पर साहसिक और न्यायसंगत रुख अपनाती है, तो वह सामान्य वर्ग के बीच खोया हुआ विश्वास दोबारा हासिल कर सकती है।अंत में स्पष्ट किया गया कि देश का युवा, शिक्षक समाज और सामान्य वर्ग अब इस विषय पर चुप नहीं रहेगा।