सम्यक्त्व को लेकर संशय नहीं, उसे जगाने का पुरुषार्थ करें : मुनि प्रमाण सागर।
SHIKHAR DARPANWednesday, September 02, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
गुणायतन में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि सम्यक दर्शन हुआ है या नहीं, इस संशय में उलझकर साधना को कमजोर करने के बजाय व्यक्ति को अपने भीतर सम्यक्त्व जगाने का निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। सम्यक दर्शन अंतःकरण की अत्यंत सूक्ष्म अवस्था है, जिसे केवल बाहरी धार्मिक क्रियाओं के आधार पर पहचानना सहज नहीं है। गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए मुनि श्री ने कहा कि साधक को इस प्रश्न में नहीं उलझना चाहिए कि उसका सम्यक दर्शन हुआ है या नहीं। यदि इस संशय के कारण धर्माचरण और आत्मसाधना कमजोर होने लगे तो यह आध्यात्मिक विकास में बड़ी बाधा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सम्यक दर्शन अत्यंत दुर्लभ निधि है। इसके प्रति जागरूक और सावधान रहना जरूरी है। साधक के अधिकार में पुरुषार्थ है, अंतिम परिणति नहीं। इसलिए परिणाम की चिंता छोड़कर वर्तमान कर्तव्य और साधना के प्रति पूरी निष्ठा रखनी चाहिए।
मुनि श्री ने ‘आज्ञा सम्यक’ की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान द्वारा बताए गए मार्ग को श्रद्धापूर्वक स्वीकार करना साधना का महत्वपूर्ण अंग है। जहां शास्त्र और भगवान की आज्ञा स्पष्ट है, वहां अनावश्यक तर्क-वितर्क के बजाय श्रद्धापूर्वक उसका पालन करना चाहिए।उन्होंने श्रद्धालुओं से अनावश्यक आत्म-संशय से बाहर निकलने, सम्यक भावनाओं का विकास करने तथा मिथ्यात्व को पोषित करने वाली प्रवृत्तियों से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन को आत्मकल्याण में लगाना चाहिए। संशय में नहीं, पुरुषार्थ में जीवन लगाएं और आत्महीनता के बजाय आत्मजागरण की दिशा में आगे बढ़ें। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि गुणायतन में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः मंगल प्रवचन और सायंकाल शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। इस दौरान धर्म, दर्शन और आत्मसाधना के विभिन्न पक्षों पर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दिया जा रहा है। 2 सितंबर को मुनि श्री के 71वें जन्मदिवस के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं को उनका मंगल आशीर्वाद भी प्राप्त हुआ।