Type Here to Get Search Results !

धर्म जागरण संस्कार शिविर का शुभारंभ, मुनिश्री प्रमाण सागर ने संस्कारों को बताया उज्ज्वल भविष्य की नींव।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

तीन दिवसीय धर्म जागरण संस्कार शिविर का शुभारंभ रविवार को हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में सराक समाज के लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि "जब तक हम अपने संस्कारों को मजबूत नहीं करेंगे, तब तक हम एक श्रेष्ठ और सफल भविष्य का निर्माण नहीं कर सकते।"उड़ीसा से आए सराक बंधुओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि "सराक" शब्द "श्रावक" का ही परिवर्तित रूप है। उन्होंने बताया कि सच्चा श्रावक वही है जो जिनेंद्र भगवान के उपदेशों को सुनकर उनके अनुरूप आचरण करता है तथा सदाचार, श्रद्धा, विवेक और क्रियाशीलता से युक्त जीवन जीता है। मुनिश्री ने कहा कि समय के साथ भाषा, वेशभूषा और परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन संस्कार और श्रद्धा कभी नहीं बदलनी चाहिए। समाज में आज भी अहिंसा, शाकाहार, गुरुभक्ति और प्रभुभक्ति के प्रति जो समर्पण दिखाई देता है, वह पूर्वजों से प्राप्त संस्कारों का ही परिणाम है।

उन्होंने कहा कि केवल अतीत के गौरव का गुणगान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में धर्म, संस्कार और सदाचार का वातावरण होना चाहिए। बच्चे णमोकार मंत्र का स्मरण करें, भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाएं, अहिंसा और शाकाहार को जीवन का आदर्श बनाएं तथा व्यसनमुक्त जीवन जिएं। मुनिश्री ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक पहचान बदलना नहीं, बल्कि समाज को उसकी वास्तविक जड़ों और सांस्कृतिक विरासत का स्मरण कराना है। उन्होंने माताओं को संस्कारों की प्रथम शिक्षिका बताते हुए कहा कि वे बच्चों के चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला होती हैं। वहीं युवाओं को समाज का भविष्य बताते हुए उन्हें अपनी परंपरा, संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी परंपरा, संस्कृति और पहचान का ज्ञान नहीं होता, उसका अस्तित्व और सम्मान दोनों संकट में पड़ जाते हैं। अपनी जड़ों से कट चुका समाज दिशाहीन हो जाता है। धर्म जागरण संस्कार शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज को उसकी वास्तविक पहचान से परिचित कराना है, ताकि लोग समझ सकें कि वे तीर्थंकरों के अनुयायी हैं और उनकी पहचान अहिंसा, श्रद्धा, सदाचार तथा धर्ममय जीवन से है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि तीन दिवसीय धर्म जागरण संस्कार शिविर में जैन संघ पुणे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो लंबे समय से सराक क्षेत्र में कार्य कर रहा है। शिविर में सैकड़ों की संख्या में सराक बंधुओं ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में जागरूकता और संस्कारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.