Type Here to Get Search Results !

"विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरे मनोयोग और एकाग्रता के साथ करनी चाहिए" — मुनि प्रमाणसागर महाराज।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

गुणायतन, मधुबन में आयोजित सांयकालीन शंकासमाधान कार्यक्रम में प्रामाणिक पाठशालाओं के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुनि प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल अंक, रैंक अथवा प्रतिस्पर्धा की भावना से नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्ति और व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से अध्ययन करना चाहिए। मुनि श्री प्रामाणिक पाठशालाओं के बच्चों को तथा अभिभावकों को संबोधित कर रहे थे मुनि श्री ने  कहा कि पढ़ाई का वास्तविक लक्ष्य विषय को समझना और अपने ज्ञान का विस्तार करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अध्ययन के समय अनावश्यक बातों एवं अन्य प्रकार के विचलनों, विशेष रूप से मोबाइल और इंटरनेट के दुरुपयोग से बचना चाहिए तथा पूरी लगन, एकाग्रता और मनोयोग के साथ अध्ययन में ध्यान लगाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों पर अधिक अंक लाने अथवा रैंक प्राप्त करने का अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए।

बच्चों को प्रोत्साहित करें, उनका मनोबल बढ़ाएँ तथा उन्हें यह विश्वास दिलाएँ कि उनका प्रयास परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण है। आज अनेक विद्यार्थी अंकों और रैंक की प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं, जिससे कई बार गंभीर परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। मुनिश्री ने सभी बच्चोँ से कहा कि परीक्षा के समय भय और घबराहट को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए,विद्यार्थियों को यह विश्वास रखना चाहिए कि प्रश्न वही आएंगे जो पाठ्यक्रम में पढ़ाए गए हैं। जिसने मन लगाकर अध्ययन किया है, उसे परीक्षा से डरने की कोईआवश्यकता नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि परीक्षा में उत्तर लिखने से पूर्व भगवान का स्मरण करें, एक गहरी श्वास लें और आत्मविश्वास के साथ उत्तर लिखना प्रारंभ करें। इससे मन शांत रहता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मुनि श्री ने कहा कि जीवन में सफलता केवल अंकों से निर्धारित नहीं होती। अनेक बार देखा गया है कि औसत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी अपने परिश्रम, प्रतिभा और उत्कृष्ट व्यवहार के बल पर समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट रहते हुए निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की चिंता उचित समय पर की जानी चाहिए। छोटी आयु से ही बच्चों को अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के वातावरण में धकेलना उनकी भावनात्मक और मानसिक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए आवश्यक है कि बच्चों को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक वातावरण प्रदान किया जाए, जिससे वे आत्मविश्वासी, सक्षम एवं संस्कारवान बन सकें।मुनिश्री का यह संदेश विद्यार्थियों को तनावमुक्त होकर अध्ययन करने तथा अभिभावकों को बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने की प्रेरणा देता है।कार्यक्रम का संचालन मुनि संधानसागर महाराज ने किया। इस अवसर पर मुनि सारसागर महाराज, मुनि  समादरसागर महाराज एवं मुनि रूपसागर महाराज मंचासीन रहे।गुणायतन मध्य भारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि गुणायतन, मधुबन में प्रातःकाल 55 मिनट की वृहद् शांतिधारा मुनि श्री के मुखारविंद से 1008 मंत्रों के उच्चारण के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि जो श्रद्धालु यहाँ प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित हैं, वे तो श्रद्धाभाव के साथ इस पुण्य अवसर का लाभ प्राप्त कर ही रहे हैं, साथ ही जो श्रद्धालु दूरस्थ स्थानों से इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देख और सुन रहे हैं, वे भी अवसर मिलने पर यहाँ उपस्थित होकर पूर्ण लाभ प्राप्त करें तथा अपने जीवन को धर्ममय बनाएं।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.