पीरटांड में खाट पर महिला को ढोने की घटना के बाद ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, सड़क-पुल-पानी की मांग को लेकर हुआ बैठक।
SHIKHAR DARPANSunday, May 31, 2026
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पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।
पीरटांड़ प्रखंड के मधुबन पंचायत अंतर्गत दलुआडीह गांव में हाल ही में एक प्रसुति महिला सुनीता मुर्मू को उपचार के लिए खाट पर चार किलोमीटर तक ढोकर ले जाने की घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित ग्रामीण अब सड़क, पुल, पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन के मूड में नजर आ रहे हैं। रविवार को दलुआडीह-डीहिया गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में दलुवाडीह,कुरुवाटांड, डहिया ईटाबेडा, गाडापरोम, सहेरबेडा,जिरुआबेडा,सतकटिया,बोरवाबेडा गांव के सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए और क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा की । साथ ही बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मामले को लेकर डुमरी एसडीएम,बीडीओ, संबंधित थाना प्रभारी एवं मुखिया को आवेदन देकर जल्द कार्रवाई की मांग करेंगे। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र पहल नहीं की गई तो 5 या 6 जून को प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
बैठक में ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि हाल ही में प्रशासनिक पदाधिकारी गांव का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन बिना ग्रामीणों से बातचीत किए ही लौट गए। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब अधिकारी गांव आए थे तो उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनना जरूरी क्यों नहीं समझा। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कुछ प्रशासनिक पदाधिकारी गांव आए थे,और बोला था जल्द ही सड़क बन जाए गा लेकिन आज तक गांव में सड़क नहीं बन पाई। ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी असंतोष व्यक्त किया। उनका आरोप था कि चुनाव के समय तो मुखिया,पंचायत समिति गांव पहुंचते हैं, लेकिन उसके बाद गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक सड़क निर्माण नहीं होगा, तब तक वे मतदान को लेकर भी विचार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि दलुआडीह गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई समुचित सड़क नहीं है। किसी के बीमार पड़ने पर उसे खाट पर उठाकर करीब चार किलोमीटर दूर पिपराडीह तक ले जाना पड़ता है, जहां से वाहन की सुविधा मिलती है।
इस कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैठक में मौजूद महिलाओं ने कहा कि सड़क के अभाव में सबसे अधिक परेशानी उन्हें झेलनी पड़ती है। गांव के पुरुष जब काम के लिए बाहर चले जाते हैं और घर में कोई बीमार पड़ जाता है, तो उसे अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। महिलाओं का कहना था कि यदि सड़क और पुल का निर्माण हो जाए तो उनकी अधिकांश समस्याओं का समाधान हो सकता है। ग्रामीण रषिकलाल हेंब्रम ने कहा कि अधिकारियों का तर्क है कि यह क्षेत्र वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए सड़क निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पारसनाथ पर्वत क्षेत्र में सड़क का निर्माण हो सकता है तो दलुआडीह जैसे गांव तक सड़क क्यों नहीं बनाई जा सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों को अनदेखा किया गया तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
बैठक में उपस्थित भारत दिशोम आदिवासी संघ के जिला अध्यक्ष रंजीत हेंब्रम ने भी गांव में सड़क, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्या को गंभीर बताते हुए सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की। वहीं भाजपा नेता अमर तुरी ने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से दलुआडीह सहित आसपास के गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने की दिशा में तत्काल पहल करने की मांग की।बैठक के अंत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 5 या 6 जून को बड़ी संख्या में ग्रामीण प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़क, पुल, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वही ग्रामीणों ने "सड़क नहीं तो वोट नहीं" की बात बैठक में कई ग्रामीणों द्वारा उठाया गया, जिससे गांव में व्याप्त नाराजगी साफ दिखाई दी।इस बैठक में बुधन सोरेन,सानू मरांडी,रेमन मुर्मू,रषिकलाल हेंब्रम,बड़की देवी,मेहिलाल मरांडी,गोपाल मुर्मू,हेमलाल मुर्मू,मुंशी हांसदा,परेमचंद मरांडी,बसंती टुडू,रामलाल मरांडी,राकेश मरांडी,पुषु बेसरा,रषिकलाल मुर्मू सहित कई लोग शामिल थे।