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तीन सांसदों को रेलवे समस्याओं से कराया गया अवगत, अब पहल का इंतजार : राजेश सिन्हा।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

गिरिडीह में रेलवे सुविधाओं की बदहाल स्थिति को लेकर अब सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है। हाल के दिनों में सलैया संघर्ष मोर्चा के बैनर तले रेलवे स्टेशन परिसर में साप्ताहिक बैठकों का दौर शुरू हुआ है, जिसका असर भी अब दिखाई देने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा ने रेलवे की लंबित समस्याओं को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतने वर्षों बाद भी ठोस पहल क्यों नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि हाल ही में तीन सांसदों — कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद — को ज्ञापन सौंपा गया है। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस ज्ञापन के बाद समस्याओं का समाधान हो पाएगा। सिन्हा ने कहा कि लगभग एक सप्ताह बीतने को है, लेकिन अब तक तीनों सांसदों की ओर से क्या पहल की गई, इसकी जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ ज्ञापन देकर और फोटो छपवाने से लोगों में जागरूकता तो आती है, लेकिन धरातल पर बदलाव कब दिखेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।

राजेश सिन्हा ने बताया कि सलैया संघर्ष मोर्चा की पहली बैठक के बाद रेलवे इंटेलिजेंस विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया था और उनकी रिपोर्टिंग के बाद धनबाद डीआरएम ने मोर्चा के ट्वीट का जवाब भी दिया। हालांकि डीआरएम द्वारा राज्य सरकार से एनओसी मिलने के बाद कार्य कराने की बात कहे जाने पर उन्होंने इसे “गेंद एक-दूसरे के पाले में फेंकने” जैसा बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से रेलवे सुविधाओं की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कोलकाता और पटना जाने के लिए जो एक-एक बोगी उपलब्ध थी, उसे भी हटा लिया गया। वहीं 2019 में शिलान्यास हुए सलैया-पारसनाथ रेल लाइन परियोजना का कार्य भी अब तक ठप पड़ा है। ऐसे में अब जनता को आंदोलन की राह पकड़ने की जरूरत महसूस हो रही है। इधर सलैया संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने लंबित मांगों को लेकर तीनों सांसदों को आवेदन सौंपते हुए सलैया स्टेशन पर इंटरसिटी और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव, नई ट्रेन सेवा और रेल कनेक्टिविटी बहाल करने की मांग की।

*कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए डीआरएम धनबाद से बातचीत की। वहीं राज्यसभा सांसद डॉ. सरफराज अहमद ने कहा कि वे पहले भी सलैया की मांगों को संसद में उठा चुके हैं और आगे भी लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी उनकी प्राथमिकता है।
*गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने भी मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आंदोलन में लोगों के साथ रेल पटरी पर भी बैठेंगे। प्रतिनिधिमंडल की ओर से गौतम सोनी ने बताया कि सलैया (पचंबा) स्टेशन का मासिक राजस्व करीब 13 लाख रुपये है, जबकि न्यू गिरिडीह स्टेशन का राजस्व लगभग 6 लाख रुपये है। इसके बावजूद महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव सलैया स्टेशन पर नहीं दिया गया है।

अमित छापरिया ने बैद्यनाथ धाम-पारसनाथ धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने और सलैया-न्यू गिरिडीह रेलखंड का कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की। वहीं मिथिलेश पांडे ने इंटरसिटी ट्रेनों में अतिरिक्त आरक्षित बोगी जोड़ने की मांग उठाई। श्रीकांत सिंह ने सावन को देखते हुए शिवभक्तों की सुविधा के लिए विशेष मेमू ट्रेन चलाने की मांग की, जबकि तुलसी राणा ने कहा कि गिरिडीह शिक्षा हब के रूप में विकसित हो रहा है और बेहतर रेल सुविधा छात्रों के लिए जरूरी है। संतोष पांडे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तीन सांसद और तीन रेलवे स्टेशन होने के बावजूद आज तक कोलकाता और पटना के लिए सीधी ट्रेन सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी है। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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