मधुबन में मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति का दो दिवसीय धर्म सम्मेलन शुरू, पूजा-अर्चना में उमड़ा आदिवासी समुदाय का जनसैलाब//नेपाल, बांग्लादेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, मरांग बुरु के संरक्षण और धार्मिक आस्था को लेकर हुई चर्चा।
SHIKHAR DARPANWednesday, November 04, 2026
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मधुबन,शिखर दर्पण संवाददाता।
विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल सम्मेद शिखरजी की तलहटी स्थित मधुबन में मरांग बुरु बचाव संघर्ष समिति का दो दिवसीय धर्म सम्मेलन बुधवार से शुरू हुआ। सम्मेलन की शुरुआत मांझी थान में स्थापित मरांग बुरु की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर की गई। इस अवसर पर आदिवासी समुदाय के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु जुटे और अपनी धार्मिक आस्था प्रकट की। झारखंड सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री फागू बेसरा के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय के पुजारियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मरांग बुरु की पूजा-अर्चना कराई। इस दो दिवसीय सम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम से प्रतिनिधि शामिल हुए। वहीं नेपाल और बांग्लादेश से भी प्रतिनिधियों ने पहुंचकर सम्मेलन में अपनी भागीदारी निभाई।
पूजा-अर्चना के बाद मधुबन की तलहटी स्थित कोरिया भवन में धर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। यहां विभिन्न वक्ताओं ने मरांग बुरु के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के लोगों में मरांग बुरु के प्रति आस्था, भक्ति और एकजुटता की भावना को मजबूत करना है।वक्ताओं ने कहा कि मरांग बुरु आदिवासी समाज की आस्था और पहचान का प्रमुख केंद्र है। इसके संरक्षण और धार्मिक महत्व को लेकर राज्य सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। सम्मेलन के माध्यम से राज्य सरकार से मरांग बुरु के विषय पर सकारात्मक पहल करने की अपील भी की जाएगी।इस अवसर पर महावीर मुर्मू, दिलीप मुर्मू, शशांक बेसरा, महेश मरांडी सहित समिति के कई सदस्य एवं आदिवासी समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।