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पारसनाथ पहाड़ को लेकर फिर गरमाया विवाद, आदिवासी संगठन ने जैन समुदाय के दावे का किया विरोध।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता। 

पारसनाथ पहाड़ को लेकर आदिवासी और जैन समुदाय के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मारांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा ने विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा पारसनाथ पहाड़ के संरक्षण और दावे को लेकर दिए गए बयान का विरोध किया है। मोर्चा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों का पवित्र धार्मिक स्थल ‘मारांग बुरू’ है। संगठन के अनुसार, आदिवासी समुदाय सदियों से यहां पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करता आ रहा है। मोर्चा ने दावा किया कि मारांग बुरू क्षेत्र में 24 से अधिक टोले हैं, जहां आज भी पारंपरिक माझी व्यवस्था लागू है। संगठन ने कहा कि न्यायालय द्वारा आदिवासी समुदाय के प्रथागत और पुरखौती अधिकारों को मान्यता दी गई है।

ऐसे में पारसनाथ को लेकर जैन समुदाय के पक्ष में किसी भी तरह की एकतरफा सरकारी व्यवस्था आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। मोर्चा ने ‘सम्मेद शिखर’ और ‘मारांग बुरू’ की पहचान को लेकर भी आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों में मारांग बुरू का उल्लेख मिलता है और पारसनाथ पर्वत आदिवासी समुदाय का प्राचीन धार्मिक स्थल रहा है। मोर्चा ने केंद्र और राज्य सरकार से पारसनाथ से संबंधित किसी भी एकतरफा आदेश की समीक्षा करने तथा आदिवासी समुदाय के पारंपरिक एवं प्रथागत अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आदिवासी समुदाय व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा। प्रेस वार्ता में मोर्चा के जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू, सचिव विष्णु किस्कू, सुधीर बास्के, सुरेश हेम्ब्रम, मदन हेम्ब्रम, सुशांत प्रसाद सोरेन, दिलीप मुर्मू सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।

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