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अलपिटो पंचायत के मुंहबोले ‘मुंशीजी’ पूर्व ग्रामीण डाक सेवक राजेश्वर पाठक का निधन।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

हेठली बोदरा निवासी पूर्व ग्रामीण डाक सेवक राजेश्वर पाठक का बुधवार अहले सुबह निधन हो गया। वे लगभग 85 वर्ष के थे। उनके निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।राजेश्वर पाठक अपने सेवा काल में एक समर्पित ग्रामीण डाक सेवक के रूप में जाने जाते थे। उस दौर में जब संचार के साधन सीमित थे, तब वे धूप, बारिश और कड़ाके की ठंड की परवाह किए बिना करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में पैदल चलकर लोगों तक चिट्ठी-पत्री और जरूरी संदेश पहुंचाते थे। उस समय पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय पत्र ही दूर-दराज के रिश्तेदारों, नौकरी के नियुक्ति पत्र और शादी-विवाह की खबरों का मुख्य माध्यम हुआ करता था।गांव में जब डाक सेवक किसी घर के दरवाजे पर पहुंचते थे तो परिवार के लोगों के मन में कई तरह के सवाल उमड़ पड़ते थे। चिट्ठी खुलते ही कभी खुशी तो कभी भावुकता का माहौल बन जाता था।

इसी सादगी और समर्पण के कारण वे पूरे पंचायत में ‘मुंशीजी’ के नाम से प्रसिद्ध थे और लोगों के बीच उन्हें काफी सम्मान प्राप्त था। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। वन संरक्षण और समाजहित के कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही। इसके साथ ही उन्हें लेखन और गायन का भी शौक था। उनकी कई कविताएं आज भी लोगों की जुबान पर हैं।हाल ही में क्षेत्र की खराब सड़कों को लेकर उन्होंने सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर के साथ हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल को अपने छोटे पुत्र अधिवक्ता शैलेन्द्र पाठक के माध्यम से पत्र लिखकर सड़क निर्माण की मांग भी की थी।अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से पंचायत ने एक ऐसे कर्मठ और सम्मानित व्यक्तित्व को खो दिया, जिन्हें लोग आज भी स्नेहपूर्वक ‘मुंशीजी’ के नाम से याद करते हैं।

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