आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, भाजपा ने मीसाबंदियों के संघर्ष को किया नमन।
SHIKHAR DARPANFriday, June 26, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी गिरिडीह महानगर द्वारा लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानियों एवं मीसाबंदियों लक्ष्मण स्वर्णकार और कृष्ण रंजन प्रसाद को अलग-अलग कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया। भाजपा महानगर जिला अध्यक्ष रंजीत कुमार राय ने दोनों लोकतंत्र सेनानियों को अंगवस्त्र एवं सम्मान-पत्र भेंट कर उनके साहस, त्याग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण को नमन किया। इस अवसर पर रंजीत कुमार राय ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया गया तथा विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेलों में बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों का सम्मान राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। सम्मान ग्रहण करने के बाद वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी कृष्ण रंजन प्रसाद ने आपातकाल के दौरान अपने संघर्षपूर्ण अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि उन्हें चार वर्षों से अधिक समय तक विभिन्न जेलों में रखा गया और इस दौरान अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जेल में रहने के दौरान उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति भी नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने लोकतंत्र और राष्ट्रहित के अपने संकल्प से कभी समझौता नहीं किया।कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष केवल तत्कालीन सरकार के विरोध तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारत के संविधान, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए किया गया ऐतिहासिक आंदोलन था। नई पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत कराना समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री संजीव कुमार, जिला महामंत्री संदीप डैंगेइच, जिला उपाध्यक्ष देवराज, पूर्व जिला उपाध्यक्ष संजय कुमार सिंह, जिला मंत्री सुरेश प्रसाद मंडल, किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष अनूप सिन्हा सहित कई भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन लोकतंत्र की रक्षा और संविधान की मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।